बाहरी. चूना पुती गली, Lin का दरवाज़ा - तड़के
गली के आर-पार कपड़े सूख रहे हैं। दादी LIN (अस्सी के पार) अपने दरवाज़े से एक पुरानी साइकिल बाहर निकालती हैं। दोनों हाथ हैंडल पर।
उनका अँगूठा घंटी तक पहुँचता है। वहीं टिक जाता है। वो घंटी नहीं बजातीं।
गली दूर तक जाती है। वो साइकिल को बीचोंबीच पैदल ले चलती हैं। उस पर बैठती नहीं।
पड़ोसन (O.S.)
अब भी पैदल ही, Lin आंटी?
पत्तों की छाया उनके चेहरे पर सरकती है। नज़रें नीचे। एक बहुत हल्की मुस्कान। कोई जवाब नहीं।
आगे का पहिया पत्थरों पर टिक-टिक करता चलता है। वही पत्थर, वही रफ़्तार, हर सुबह।
वो गली के छोर की रोशनी की ओर बढ़ती जाती हैं। साइकिल उनका साथ देती है।
कट टू:



































