बाहरी. छत, पुराना मोहल्ला - दिन
छतों पर हवा। HANA (15), गुलाबी बाल, गाल पर पट्टी, पीला रेनकोट, मुंडेर के किनारे खड़ी है। सिर्फ़ उसके बाल हिलते हैं।
उसके नीचे, पूरा शहर धूसर धुंध में। वहाँ से एक भी आवाज़ ऊपर नहीं आती।
उसकी आँख फैलती है। पुतली सिकुड़ती है। नीचे कुछ हिला है।
HANA
(बमुश्किल एक साँस में)
वो लौट रहा है।
हवा दोगुनी हो जाती है। वो पैर जमाती है, मुट्ठी भींचती है और हवा में आगे झुक जाती है।
HANA
इस बार नहीं।
स्मैश कट टू:































